Sunday, 6 June 2021

#13 वह चिड़िया

 दीवार पर लगा दर्पण,

 दर्पण के सामने बैठी वह चिड़िया,

 जो बार-बार देख कर, 

अपना प्रतिबिंब दर्पण में, 

चोट मार रही है, 

उस पर अनवरत I

 लगता है उस नासमझ को,

 सामने बैठी है कोई दूसरी चिड़िया, 

पर अपनी नासमझी में भी, 

वह तो मुझे कुछ सिखा रही है I

शायद अपने आप को मारना,

 आत्म चिंतन करना, 

क्योंकि आज तक देखकर, 

चेहरा अपना दर्पण में, 

मैं सदा ही मुस्कुराया हूँI

                                  दीपक जुनेजा 

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