Saturday, 5 June 2021

# 1 वह ग्रेजुएट हो गया है

 वह बेचारा कभी,

 जोरों से बालों को कचोटता I

 कभी बनाकर मुट्ठी,

 सिर पर जोरों से ठोकता I

कभी बनाकर एक अजीब सी मुख मुद्रा,

 उसी मुख मुद्रा में आंखों से आंसू टपकाता I

 कभी वह अभागा, 

नाखूनों को मुंह से कुतरता I

कभी लेट कर बेचारा ,

अपलक सूने गगन को निहारता I

कभी उत्सुकता से वह अखबारों के पन्ने पलटता, 

कभी रात भर बेचारा करवटों से करवटें बदलता I

कभी घंटों बैठकर,

 वह अपनी ठुड्डी को सहलाता I

कभी ठुड्डी को  उंगली पर टिका कर,

 विचार मग्न हो जाता I

उस शख्स की अजीब हरकतें देखकर ,

सोचने लगा मैं भी ,

आखिर इसे हो क्या गया है ?

बाद में मालूम पड़ा ,

भारत का वह बेचारा भविष्य 

इस वर्ष  ग्रेजुएट हो गया हैI -----
                                                            दीपक जुनेजा 

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