Saturday, 5 June 2021

# 2 छोड़ दे यादों की डाली को

 यादों के सहारे जीने वाले ऐ मानुष,

 कल्पनाओं में ही तू भटक जाएगा I

 कुछ कर जल्दी कर वरना,

तेरा समय सपने देखने में ही  निकल जाएगा I

तुझे बहुत फक्र है उन यादों पर,

जो तुझे दिन प्रतिदिन रुलाती है I

कभी चेहरे पर अनायास मुस्कान, 

तो कभी आंखों से आंसू टपका जाती है I

यादों को ही जिंदगी बनाने वाले ऐ मानुष, 

जिंदगी तेरे लिए खिलौना बन जाएगी I

जिंदगी को सोच समझ,

वरना यह तो अविरल गुजरती जाएगी I

तुझे बहुत गुमान है उन यादों पर,

जो तुझे भूतकाल में ले जाती है I

बीते हुए सुख को दुख की चादर ओढ़ा,

 तुझे और दुखी कर जाती है I

यादों के पेड़ो पर लटकने वाले ऐ मानुष, 

जिंदगी बहुत हसीन बन जाएगी I

समय रहते तो छोड़ दे यादों की डाली को,

वरना नीचे खाई गहरी होती जाएगीI               दीपक जुनेजा 

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