इस दुनिया ने जिंदगी को,
यह कैसा निराश मोड़ दिया हैI
बाद भारी इल्म के,
नापने को लंबा चौड़ा रोड दिया है I
भावनाओं के बजाय हमें,
अर्थ नाम के शैतान से जोड़ दिया हैI
ईर्ष्या के गोंद से ,
लोगों के खुले दिमागों को,
सिकोड़ दिया है I
ना रहे शेष एक कतरा भी खून का
आदमी को इतना निचोड़ दिया हैI
प्यार की हसीन दीवार को,
वासना के हथौड़े से तोड़ दिया हैI
लगता है भगवान ने ,
आजकल धरती पर अवतार लेना छोड़ दिया है I
दीपक जुनेजा
No comments:
Post a Comment