पीते हैं लोग जो,
शराब के प्याले,
गम भुलाने कोI
ताकि सो सकें वे,
एक मीठी मस्त नींद,
अगली सुबह पीने पिलाने को I
सलाह है मेरी उन्हें,
अजी जनाब जरूर पीजिए,
पर जहर का एक प्याला,
और सोईए ऐसी मस्त नींद,
जहां ना कोई शौक, ना कोई गिला,
ना कोई गम ना ही शिकवा I
वो इसलिए जनाब कि,
शराब का तो नशा उतरते ही,
गमों के समुद्र में आता है,
पुनः ज्वार,
पर जहर-- जहर का तो जनाब कभी नशा उतरता ही नहींI
दीपक जुनेजा
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