हरे भरे वृक्षों वाली,
एक सुंदर सी वाटिका,
दिखाई दी दूर कहीं,
मुझे राह में,
रोक न सका अपने चंचल मन को,
और घुस गया बेधड़क,
भीतर महसूस हुए मुझे,
गर्म हवाओं के थपेड़े,
तो कहीं दिखाई दिए,
कांटो में लिपटे फूल,
झुकी हुई शाखाएं वृक्षों की,
अनवरत कर रही थी कोशिश,
एक दूसरे को पीछे छोड़ने की,
इन्हीं गर्म थपेड़ों के वेग में,
सुदूर छाई थी चारों तरफ काली घटाएं,
पल भर के लिए जरूर हुआ था मैं अचेतन,
और तुरंत हुआ अह्सास,
यही तो है वास्तविकता इस जीवन कीI
दीपक जुनेजा
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