Monday, 7 June 2021

#17 एक लड़की की व्यथा

 जिंदगी के सुहावने उपवन में,

लंबी हरी भरी जमीन  पर,

 नजर आए थे, 

 मुझे कई पेड़, 

कुछ लग रहे थे, 

बहुत ही हरे-भरे, 

कुछ दिखाई दिए, 

एक सुदूर कोहरे की तरहI 

देखे थे ख्वाब कई मैंने, 

 उनके आश्रय बह रही सुगंधित हवाओं के, 

 सुखद छायाओ के, 

पर आज बैठा दिया गया है मुझे,

 उस पेड़ की छाया तले, 

लंबे समय के लिए, 

जो मुझे दूर तक नहीं आया था नजर,

 जिसकी सूखी टहनियों पर मुरझाए पत्तों ने, 

ढाया है कहर, 

इस कदर मेरी जिंदगी में, 

कि मैं धूप से बेहाल हुए जा रही हूँI

                                                      दीपक जुनेजा

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