Tuesday, 8 June 2021

#21 लॉकडाउन

 एक अदृश्य दुश्मन,

 और चल पड़ा जैसे,

 अनसुने शब्दों का एक अनिमंत्रित कारवाँ,

 बहुत जरूरी थी बारी 'लॉक डाउन' की,

 दबाने को इस दुष्ट 'वायरस' की किलकारी, 

और आते ही लोग इसके, 

'सैनिटाइज' हो गए. 

रिश्ते 'क्वारंटाइन' हो गए, 

और आपसी प्रेम पड़ा है, 

किसी कोने में 'आइसोलेट' होकर,

 एक दूसरे पर विश्वास बहुत 'क्रिटिकल' है,

 कर रहा है संघर्ष अपना अस्तित्व बचाने के लिए,

'वैरिएंट' लोग बदल रहे हैं या 'वायरस'I

इन्सानियत के 'वेंटीलेटर' तक पहुँचने से पहले,  

 काश जल्द हो जाए जीरो 'ऑक्सीजन लेवल'

इस 'डेडली'  दुश्मन का I

                                    दीपक जुनेजा 

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