Friday, 11 June 2021

#23 एक माँ की व्यथा


 जी तो बहुत चाहता है,

 तुझे बाहों में भर के चूम लूँ,

 गले से लगाकर,

 गोद में बिठाकर,

 खाना खिलाऊँ अपने हाथों से I

तेरी किलकारियां आज भी बहुत सुहाती है,

 तेरी तोतली जुबान पर दिल उमड़ पड़ता है,

 काश तुझे सीने से लगा पाती I

 इतनी दूर से तुझे मेरे लिए रोता देख, 

मेरा भी दिल रो पड़ता है,

 काश तुझे चुप करा पाती I

 माफ कर देना बेटा मजबूर हूँ, 

 तेरी सेहत के लिए, 

अपने देश की सेहत के लिए, 

समझने की कोशिश करो बेटा,

 देश संकट में है I

तुम्हारी मां लड़ रही है एक जंग,

 अस्पताल से कोरोना योद्धा  बन कर, 

मत रो बेटा,

 जल्द ही आएगा वो दिन, 

जब ये काले बादल छंट जाएंगे, 

और मैं लौट आऊंगी घर, 

कोई योद्धा नहीं,

बल्कि तुम्हारी अपनी मां बनकरI

                                       दीपक जुनेजा 

                                      #Photo courtesy internet

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