Saturday, 5 June 2021

#4 माँ

 इस ममतामयी  शख्स को,

 किन शब्दों में मैं 

बयां करूं !

 माता, जननी, जन्मदायिनी

 ईश्वर से बढ़कर, 

कुछ भी कहूँ तो कम है I

औलाद आंखों के सामने है,

 यही पल उसके लिए स्वर्णिम है I

स्वयं गीले में सो कर भी, 

बेटे को सूखे में सुलाती हैI

 माँअपनी आंखों की हवा से, 

बेटे के आंसू सुखाती हैI 

ईश्वर तूने कैसे बनाया यह वात्सल्य प्रेम?

 जिससे स्वार्थ की बदबू तक नहीं आती हैI                दीपक जुनेजा

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