सावधान !
ना जाना बाहर,
पता नहीं कौन लिए घूम रहा है,
जहर तुम्हारे लिए,
एक छूटी साँस और अदृश्य जहर,
सीधा तुम्हारी सांसों मेंI
कहते हैं आया है चमगादड़ों से,
और पता भी नहीं चलता, जहर पान करने वाले को,
कभी-कभी तो सांस टूट जाने तक भीI
जहर तो जहर है,
इंसान तो उगलता ही आ रहा है,
एक दूसरे के खिलाफ,
धर्म जाति और रंग के नाम पर,
कभी पीठ पीछे, कभी सामने से,
ये जहर सुनाई देता है,
अक्सर आते जातेI
और वो जहर सिर्फ दिखाई देता है,
थोड़ा समय गुजर जाने के बादI
पर यह जहर है ज्यादा जहरीला उस जहर से,
क्योंकि वह जहर तो मिट जाएगा,
एक दिन खुद ब खुदI
पर यह जहर तो मारता ही रहेगा,
आजीवन लोगों को,
अनवरत अनिर्बाध और वैक्सीन रहितI
दीपक जुनेजा
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